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rakeshgupta


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ये कैसी आग है लगी, जल रही है जिन्दगी,

Posted On: 26 May, 2012  
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***तय है क़ानून की हार होगी***’

Posted On: 24 May, 2012  
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तू मुझसे और मैं तुझसे हूँ, हम मैं आखिर फर्क है क्या ?

Posted On: 22 May, 2012  
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क्यों प्रलय की आहट, देती ना सुनाई है………

Posted On: 21 May, 2012  
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अहिंसा की रट छोड़ हाथ तलवार होना चाहिए

Posted On: 21 May, 2012  
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आतंकियों का दोष कहाँ, नेताओं की शय है दोस्त.

Posted On: 7 Sep, 2011  
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के द्वारा:

के द्वारा: Arunesh Mishra Arunesh Mishra

उभरते विकासशील भारत, महाशक्ति भारत, नौ प्रतिशत की दर से बढ़ते भारत, टाटा, अंबानी जैसे विश्व के सबसे अमीरों के भारत का पोल खोल दी ग्लोबर हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट में जिसमंे भारत को कुपोषित, रोगग्रस्त और भुखमरी की कगार पर खड़े लोगों से भरा बताया गया है । इस रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में सबसे अधिक कुपोषित बच्चे भारत में हैं क्योंकि महिलाएं भी कुपोषित हैं । 84 देशों की सूची में भारत को 67 वां स्थान मिला है । क्या भारत के अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री जी सुन रहे हैं और आई सी सी के अध्यक्ष और पार्ट टाईम कृषी मंत्री जी को कुछ शर्म महसूस हो रही है । नहीं होगी । क्योंकि उनको तो बाजार में बिक रहे आटे, दाल चावल, सब्जियों का भाव न मालूम होगा पर मल्टी नेशनल कम्पनियों से मिलने वाला अपना कमीशन जरूर याद होगा । भारत के आमजन की असली तस्वीर पेश करती कविता के लिये आभार ।

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